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The second Chhattisgarhi film 'Ghar Dwar' is basically based on a family story. According to the information given by the film's producer, late Shri Vijay Kumar Pandey's successful son Shri Jaiprakash Pandey and today's veteran artist Shri Shivkumar Deepak, who was an important part of this film, the main characters include Dulari Bai (mother), Kan Mohan (elder brother), Ranjita Thakur (elder brother's wife), Zafar Ali Farishta (younger brother), Geeta Kaushal (younger brother's wife), Basant Diwan (accountant), Iqbal Ahmed Rizvi (broker) and Shivkumar Deepak (younger brother's wife's maternal uncle). Apart from this, the most notable fact is that late Shri Vijay Pandey himself has played a brief role of a Seth of Raipur in this film . According to the story, the father of both the brothers in the central role dies in their childhood. Their mother brings up both the sons by working hard. The elder son lives his life between farming and household responsibilities. The elder brother and mother together send the younger brother to the city (Raipur) for studies. The younger son, who returns from here after studying, becomes the cause of discord in the house due to bad company in the city. He marries from the city itself and returns to the village, his wife's cunning maternal uncle also comes along with him. Circumstances become such that due to domestic discord, the days of misery come. In the meantime, the mother also leaves this world. The elder brother comes to the city with his wife and earns every penny by driving a rickshaw. Here he meets a kind-hearted and generous businessman, who is an old friend of his father. This businessman supports him. The story takes a new turn and the ancestral house in the village is about to be auctioned. In such a situation, the businessman reaches the village with the elder brother and buys the house by placing the last bid himself and returns after handing it over to both the brothers.
कहानी छत्तीसगढ़ (तब मध्यप्रदेश) के एक गांव की है, जहाँ जातिवाद गहराई से फैला हुआ है। फ़िल्म की शुरुआत होती है जमींदार और पुरोहित (पंडित) की बातचीत से, जिसमें वे सतनामी समाज के चरणदास से ज़मीन वापस लेने की योजना बनाते हैं। जमींदार अपनी पत्नी दुलारी से भी इस बारे में चर्चा करता है। चरणदास की पत्नी फुलवती उसे समझाती है कि विवाद करने के बजाय बात को आपसी समझ से सुलझा लेना बेहतर है। वहीं पुरोहित गांव में सतनामी समाज के खिलाफ़ ऊँची जातियों में नफ़रत फैलाने की कोशिश करता है। लेकिन गांव के बच्चे इस जातिवाद पर सवाल उठाते हैं और स्कूल में इस मुद्दे पर चर्चा करते हैं। कुछ सालों बाद, नयंदास (चरणदास का बेटा) कृषि विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करके गांव लौटता है। वह गांव के किसानों की मदद करने लगता है। वह अपनी बचपन की सहेलियों रूपा और गीता (जमींदार की बहनें) से दोबारा मिलता है। रूपा और नयंदास के बीच बचपन का लगाव अब प्रेम में बदल जाता है, लेकिन वे जानते हैं कि दोनों अलग जातियों से हैं। इस प्रेम को देखकर कमल नारायण पांडे को जलन होती है। वह अफवाह फैलाता है कि रूपा और गीता अब शादी के लायक नहीं रहीं। वह रूपा से जबरदस्ती शादी करना चाहता है, और पुरोहित से रिश्वत देकर शादी की बातचीत को टालता है। कमल बार-बार अफवाहें फैलाता है, जिससे रूपा इतने दुख में चली जाती है कि घर से बाहर निकलना बंद कर देती है। नयंदास गांव में एक कृषक सहकारी समिति (co-operative society) बनाने की कोशिश करता है। उसी समय उसका दोस्त डॉ. रविकांत तिवारी गांव में पोस्टिंग पाकर आ जाता है। कमल जब रूपा को फिर से जबरदस्ती शादी के लिए दबाता है और अफवाहें फैलाता है, तो रूपा, नयंदास, गीता और डॉ. रविकांत मिलकर समाज से लड़ने का फैसला करते हैं। रूपा और नयंदास मंदिर में शादी कर लेते हैं, और फिर अपने-अपने परिवार को समझा कर जातिवाद के खिलाफ़ एक नया संदेश देते हैं।
There is a plant in Chhattisgarh called "bhulan kaanda", if you step on that you will forget the way you are going to, and will not recover the situations unless someone touches you. The story is of a tribal village of Chhattisgarh. Bhakla and Birju are resident of village Mahuabhata. One day they had a fight on the occupancy of the land. Incidentally Birju dies after falling on plough. Bhakla had a family so the villagers are not in a favor to send him to jail, instead they requested a lonely living old man "Ganjha" from the same village to take all charges of murder.
“माया” एक लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी फिल्म है, जिसकी कहानी सच्चे प्रेम, भावनाओं और रिश्तों की जटिलताओं के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म एक साधारण लेकिन संवेदनशील युवक और युवती की प्रेम कहानी को दर्शाती है, जहाँ मासूम मोहब्बत धीरे-धीरे गहरे लगाव में बदल जाती है। हालांकि गलतफहमियाँ, परिस्थितियाँ और समाज की सोच उनके रिश्ते की परीक्षा लेती हैं, जिससे प्रेम और कर्तव्य के बीच टकराव पैदा होता है। भावनात्मक मोड़ों के साथ आगे बढ़ती यह कहानी यह संदेश देती है कि माया (प्रेम) केवल आकर्षण नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग और समझ का नाम है, और सच्चा प्रेम हर कठिनाई के बाद भी अपने अस्तित्व को बनाए रखता है।
“मया देदे मया लेले” (2001) एक भावनात्मक और पारिवारिक छत्तीसगढ़ी फिल्म है, जिसकी कहानी प्रेम, त्याग और रिश्तों की अहमियत को दर्शाती है। फिल्म एक सादे दिल के युवक और युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके बीच सच्चा और निश्छल प्रेम पनपता है, लेकिन सामाजिक बंधन, गलतफहमियाँ और परिस्थितियाँ उनके रिश्ते की राह में बाधा बन जाती हैं। कहानी आगे बढ़ते हुए यह दिखाती है कि जब रिश्तों में स्वार्थ आ जाता है तो प्रेम टूटने लगता है, जबकि त्याग, विश्वास और सच्ची भावना से ही रिश्ते मजबूत बनते हैं। फिल्म का मूल संदेश यही है कि मया (प्रेम) माँगने या सौदे का विषय नहीं, बल्कि दिल से दिया और निभाया जाने वाला एहसास है।
“मोर छइहाँ भुइयाँ” (2000) एक सामाजिक-पारिवारिक छत्तीसगढ़ी फिल्म है, जिसकी कहानी गाँव की मिट्टी, परंपराओं और आपसी रिश्तों से गहराई से जुड़ी हुई है। फिल्म एक सरल, ईमानदार और संस्कारी युवक की कहानी कहती है, जो अपनी जमीन, परिवार और मूल्यों से गहरा लगाव रखता है। आधुनिक सोच और स्वार्थी तत्वों के कारण गाँव की शांति और सामूहिक जीवन में टकराव पैदा होता है, लेकिन प्रेम, हास्य और भावनात्मक घटनाओं के माध्यम से कहानी आगे बढ़ती है। अंततः यह फिल्म यह संदेश देती है कि अपनी “छइहाँ भुइयाँ” यानी अपनी जन्मभूमि, संस्कार और परिवार से जुड़ाव ही इंसान की असली पहचान और ताकत होती है, और इन्हीं मूल्यों में सच्चा सुख और सम्मान छिपा होता है। मोर छइहाँ भुइयाँ वर्ष 2000 में बनी एक छत्तीसगढ़ी भाषा की कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन सतीश जैन ने किया था। फिल्म में शेखर सोनी, अनुज शर्मा, पूनम नक़वी, जागृति राय, आशीष शेंद्रे और मनमोहन ठाकुर ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। यह फिल्म घर द्वार (1971) के बाद छत्तीसगढ़ी भाषा में बनी पहली फिल्म थी। 27 अक्टूबर 2000 (दीपावली) के दिन रिलीज़ हुई यह फिल्म व्यावसायिक और समीक्षात्मक दोनों दृष्टि से अत्यंत सफल रही। शिवदयाल जैन द्वारा निर्मित इस फिल्म को अनुज शर्मा की डेब्यू फिल्म के रूप में जाना जाता है और इसे छत्तीसगढ़ के अपने फिल्म उद्योग, यानी छॉलीवुड, को नई दिशा और गति देने का श्रेय भी दिया जाता है।
पॉपकॉर्न फिल्म्स के बैनर तले बनी छत्तीसगढ़ी फिल्म “ले चलहू अपन दुवारी”, जो 13 जनवरी 2023 को रिलीज़ हुई, आज के दौर में भी सादगी और गहराई से भरी एक प्रभावशाली कहानी पेश करती है। यह फिल्म एक आर्मी ऑफिसर कार्तिक की भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण यात्रा को दर्शाती है, जो पाँच साल बाद अपने गाँव वापस लौटता है। घर आने पर वह देखता है कि समय के साथ सब कुछ बदल गया है, लेकिन उसके गाँव की सोच आज भी वहीं अटकी हुई है। पथरी और धनोरा नाम के दो पड़ोसी गाँवों के बीच चला आ रहा पुराना विवाद अब भी जारी है। कार्तिक को यह एहसास होता है कि इस टकराव की जड़ें किसी व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही रूढ़िवादी और संकीर्ण मानसिकता में हैं, जिसने लोगों के मन-मस्तिष्क को जकड़ रखा है। फिल्म इसी सोच को सवालों के घेरे में लाते हुए सामाजिक बदलाव का सशक्त संदेश देती है।
“झन भूलो माँ-बाप ला” एक भावनात्मक छत्तीसगढ़ी फिल्म है, जिसकी कहानी उन माता-पिता के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जीवनभर त्याग करते हैं, लेकिन जब वही बच्चे बड़े होकर आधुनिक सोच, स्वार्थ और बाहरी प्रभावों में पड़ जाते हैं तो अपने माँ-बाप को बोझ समझने लगते हैं। समय के साथ माता-पिता को उपेक्षा, अपमान और अकेलेपन का सामना करना पड़ता है, जिससे परिवार में भावनात्मक टकराव पैदा होता है। फिल्म संवेदनशील घटनाओं के माध्यम से यह सशक्त संदेश देती है कि माँ-बाप का सम्मान, प्रेम और सेवा करना ही सच्चा संस्कार और सबसे बड़ा धर्म है, और उन्हें भूल जाना जीवन की सबसे बड़ी भूल है।
डार्लिंग प्यार झुकता नहीं 2 (छत्तीसगढ़ी फिल्म) एक रोमांटिक-ड्रामा कहानी है, जिसमें लवेश नाम का एक गरीब युवा लड़का सोनीया से गहरा प्रेम करता है लेकिन शुरुआत में सोनीया उसके प्यार को स्वीकार नहीं करती। समय के साथ लवेश अपनी पढ़ाई और स्वभाव में बदलाव लाता है, मेहनत से खुद को स्थापित करता है और आगे जाकर सोनीया का दिल जीत लेता है। हालांकि फिल्म में बलवंत जैसे विपरीत पात्र भी होते हैं जो उनकी प्रेम कहानी में बाधा डालने की कोशिश करते हैं, लेकिन सच्चा प्यार अंत में हर मुश्किल को पार कर दोनों को एक साथ जोड़ देता है। यह फिल्म प्यार, परिवर्तन, संघर्ष और जीत की भावना को भावनात्मक रूप से दर्शाती है।
हीरो नं. 1 एक मनोरंजक छॉलीवुड फिल्म है, जिसकी कहानी छत्तीसगढ़ी सिनेमा के एक मशहूर सुपरस्टार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शोहरत और सफलता की ऊँचाइयों पर होने के बावजूद आम लोगों की समस्याओं, रिश्तों और समाज में फैले अन्याय से जुड़ता है; फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक स्टार अपनी लोकप्रियता और ताकत का इस्तेमाल सच्चाई के पक्ष में खड़े होने, गलत लोगों को बेनकाब करने और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए करता है, और अंत में यह संदेश देता है कि असली हीरो वही होता है जो नाम और पहचान से ऊपर उठकर समाज की भलाई के लिए काम करे।
जय महामाया एक पारिवारिक‑रोमांटिक छत्तीसगढ़ी फिल्म है जिसमें मायामयी शक्ति और ग्रामीण जीवन की भावनाएँ प्रमुख हैं; कहानी में नायक‑नायिका के बीच प्रेम, संघर्ष और समाज के रीति‑रिवाज़ों का टकराव दिखाया जाता है, और विषय धार्मिक आस्था, आत्म‑विश्वास और परंपराओं के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद के इर्द‑गिर्द घूमती है, जहाँ नायक/परिवार अपनी विश्वास और रिश्तों को आज़माने वाली चुनौतियों से गुजरते हैं।
“Darling Pyar Jhukta Nahi” एक छॉलीवुड (छत्तीसगढ़ी) रोमांटिक-ड्रामा फिल्म है, जिसकी कहानी सच्चे प्यार, आत्म-सम्मान और रिश्तों में समझदारी पर आधारित है। फिल्म का नायक प्यार को अपने दिल से स्वीकार करता है, लेकिन उसकी प्रेम कहानी में कई सामाजिक और पारिवारिक बाधाएँ आती हैं, खासकर तब जब उसके साथी और परिवार के विचार अलग-अलग होते हैं। नायक अपने प्यार को जीतने के लिए समय, संघर्ष और सही फैसलों से गुजरता है, यह दिखाते हुए कि सच्चा प्यार कभी झुकता नहीं—भले ही रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो। कहानी में रोमांस, भावनात्मक संघर्ष और रिश्तों की गहराई को प्रमुख रूप से दिखाया जाता है, जिससे फिल्म दर्शकों को प्रेम-विश्वास और सम्मान का संदेश देती है।
“B.A. First Year” एक युवाओं पर आधारित छत्तीसगढ़ी ड्रामा फिल्म है, जो कॉलेज के पहले साल में कदम रखने वाले छात्रों की दुनिया को सच्चे और भावनात्मक अंदाज़ में पेश करती है। कहानी एक छोटे शहर से आए युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो नए माहौल में दोस्ती बनाता है, पढ़ाई की चुनौतियों, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबावों से जूझता है तथा प्रेम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन खोजने की कोशिश करता है। फिल्म यह दर्शाती है कि आत्मविश्वास, सही निर्णय और निरंतर मेहनत के दम पर युवा अपने सपनों को साकार कर सकते हैं और जीवन की कठिन राहों को पार कर सकते हैं।
“Ka Ihi La Kaithe Maya” एक छॉलीवुड (छत्तीसगढ़ी) प्रेम-प्रधान ड्रामा फिल्म है, जो जितु और मधु के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी की शुरुआत मासूम और गहरे प्रेम से होती है, लेकिन हालात, गलतफहमियाँ, धोखा और भरोसे की कमी उनके रिश्ते को कठिन मोड़ पर ले आती है। जैसे-जैसे परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण होती जाती हैं, वैसे-वैसे प्रेम की सच्चाई भी परखी जाती है। संकट के समय जितु मधु की जान बचाकर अपने प्यार और जिम्मेदारी को साबित करता है, और अंततः दोनों तमाम संघर्षों को पार कर फिर से एक-दूसरे के साथ नई शुरुआत करते हैं। फिल्म प्रेम, आस्था, त्याग और भावनात्मक जुड़ाव की सशक्त कहानी प्रस्तुत करती है।
“B.A. Second Year” एक छॉलीवुड (छत्तीसगढ़ी) रोमांटिक-ड्रामा फिल्म है, जो कॉलेज के दूसरे वर्ष में पढ़ रहे युवाओं की वास्तविक ज़िंदगी को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है। कहानी एक ऐसे छात्र के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पहले साल के अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़ता है और अब नए रिश्तों, दोस्ती, प्यार, पढ़ाई के दबाव तथा सामाजिक प्रतिस्पर्धा का सामना करता है। अपने सपनों और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए वह कई चुनौतियों से गुजरता है, और फिल्म यह संदेश देती है कि लगातार मेहनत, धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ युवा हर कठिनाई को पार कर सफलता की ओर बढ़ सकते हैं।
“Hans Jhan Pagli Phans Jabe” (हस झन पगली फस जाबे) एक छॉलीवुड (छत्तीसगढ़ी) रोमांटिक-ड्रामा फिल्म है, जो हल्के-फुल्के हास्य के साथ गहरे भावनात्मक रिश्तों की कहानी कहती है। फिल्म में मन कुरैशी और अनिकृति चौहान के किरदारों के बीच दोस्ती से शुरू होकर प्रेम तक पहुँचने का सफ़र दिखाया गया है, जहाँ गलतफहमियाँ, परिस्थितियाँ और जीवन की उलझनें उनके रिश्ते की परीक्षा लेती हैं। इसके बावजूद दोनों एक-दूसरे के लिए त्याग और समझदारी दिखाते हैं। कहानी प्रेम, भरोसे और आत्मविश्वास के सहारे आगे बढ़ती है और यह दर्शाती है कि सच्चा प्यार सूझ-बूझ और धैर्य के साथ हर कठिनाई को पार कर सकता है।
“Ek Aur Love Story” छॉलीवुड (छत्तीसगढ़ी) रोमांटिक-ड्रामा फिल्म है जो दो युवाओं के बीच के रिश्ते की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है। कहानी में मुख्य पात्रों की मुलाक़ात एक अनोखे मोड़ पर होती है, जहाँ शुरू में वे बस सामान्य दोस्त जैसा व्यवहार करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनके बीच सच्चा प्रेम उभरता है। हालांकि, उनके रिश्ते में गलतफहमियाँ, सामाजिक दबाव और पारिवारिक कठिनाइयाँ सामने आती हैं, जिससे उनके फ़ैसले और इमोशनल संघर्ष और गहरा हो जाता है। फिल्म में दिखाया गया है कि प्रेम सिर्फ़ दिल का फ़ैसला नहीं है, बल्कि उसमें बेवजह की उम्मीद, समझदारी और विश्वास भी महत्वपूर्ण होते हैं। अंत में यह कहानी यह संदेश देती है कि अगर प्यार सच्चा हो, तो हर मुश्किल और चुनौती का सामना कर के भी लोग एक-दूसरे के साथ खड़े रह सकते हैं।
Mor Jodidaar एक रोमांटिक-एक्शन फिल्म है जो प्यार, साहस और संघर्ष की कहानी पेश करती है। इसमें नायक और नायिका के बीच गहरा रिश्ता दिखाया गया है, जो जीवन की मुश्किलों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी टिकता है। फिल्म यह बताती है कि सच्चा साथी हमेशा कठिनाइयों में साथ देता है और रिश्तों की मजबूती और भरोसे को परखता है।
Mahu Kuwara Tahu Kuwari एक ऐसी फिल्म है जो प्यार, रिश्तों और जीवन की मुश्किलों को रोचक ढंग से पेश करती है। कहानी दो मुख्य पात्रों के इर्द‑गिर्द घूमती है, जो अपने रोमांस और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शक देख सकते हैं कि प्यार, संघर्ष, समझ और विश्वास कैसे उनके रिश्तों को परखते हैं, और यह साफ हो जाता है कि मजबूत रिश्तों के लिए एक-दूसरे का साथ और समझना बेहद जरूरी है।
*Benam Badshah* एक छत्तीसगढ़ी ड्रामा फिल्म है, जिसमें Karan Khan, Muskan Sahu और Rajesh Baghmare मुख्य किरदार निभाते हैं। फिल्म की कहानी पात्रों के जीवन, उनके संघर्ष और रिश्तों के इर्द‑गिर्द घूमती है, जहाँ परिवार और समाज की उम्मीदें तथा भावनात्मक उतार‑चढ़ाव अहम भूमिका निभाते हैं। यह फिल्म प्रेम, दोस्ती और जीवन की चुनौतियों को रोचक और भावनात्मक अंदाज़ में पेश करती है, जिसमें नायक को अपनी कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य तक पहुँचना होता है।
*Chal Hat Kono Dekh Lihi* एक रोमांटिक‑ड्रामा फिल्म है, जिसमें अनिकृति चौहान और दिलीश साहू मुख्य किरदार निभाते हैं। फिल्म की कहानी युवाओं के जीवन, उनके प्रेम और रिश्तों के इर्द‑गिर्द घूमती है, जहाँ उन्हें परिवार, समाज और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कहानी में यह दिखाया गया है कि सच्चा प्यार केवल भावनाओं पर नहीं बल्कि समझदारी, विश्वास और साहस के साथ निभाने पर मजबूत होता है।
*Tura Rikshawala* एक छत्तीसगढ़ी ड्रामा फिल्म है, जिसमें Prakash Awasthi और Shikha Chitambare मुख्य किरदार निभा रहे हैं और इसे Satish Jain ने निर्देशित किया है। कहानी एक रिक्शा चालक की जिंदगी के इर्द‑गिर्द घूमती है, जो अपने और परिवार के भविष्य के लिए कठिनाइयों का सामना करता है। वह सामाजिक दबावों, आर्थिक परेशानियों और रिश्तों की अपेक्षाओं से जूझते हुए अपने साहस और मेहनत को साबित करता है। फिल्म में स्थानीय जीवनशैली, संघर्ष और आम इंसान की दृढ़ता को भावनात्मक और सजीव तरीके से पेश किया गया है।
Mayaa 2 एक रोमांटिक‑ड्रामा फिल्म है, जिसमें Prakash Awasthi और Shikha Chitambare मुख्य भूमिका में हैं। कहानी प्यार, भावनाओं और रिश्तों के इर्द‑गिर्द घूमती है। फिल्म में नायक और नायिका को अपने प्रेम को निभाने के लिए पारिवारिक दबाव, सामाजिक अपेक्षाएँ और व्यक्तिगत संघर्ष झेलने पड़ते हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनके रिश्तों में विश्वास, समझ और समर्पण की परीक्षा होती है। यह फिल्म दर्शाती है कि सच्चे प्यार और रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए साहस, समर्पण और एक-दूसरे का समर्थन कितना महत्वपूर्ण है।
Dantela is a horror–mystery–thriller film inspired by real-life incidents from Chhattisgarh, presented in a fictional narrative. The story is set in a village where behind the façade of normal life lie many unresolved mysteries and frightening events. In the beginning, everything appears ordinary, but gradually strange incidents start occurring, creating an atmosphere of fear and suspicion among the villagers. The film also highlights social realities such as superstitions, traditions, and the mindset of people, which further complicate these घटनाएँ. Along with this, supernatural elements are woven into the story, making it more mysterious and terrifying. As the story progresses, it becomes difficult for the audience to distinguish between reality and illusion. This uncertainty becomes the film’s greatest strength. Overall, Dantela is a story where village reality, mystery, and fear are blended in such a way that it keeps the audience engaged till the end and delivers a unique cinematic experience.